health benefits of java plum | जामुन के औषधीय गुण जो हमारे लिए अच्छे हैं

health benefits of java plum

Introduction

गर्मियों के मौसम में वैसे तो कई फल आते हैं पर थोड़ा सा अधिक इंतजार करवा कर आता है जामुन का फल। जामुन के पेड़ में जामुन लगने में 7 से 8 वर्ष लगते हैं ।

जामुन वैसे तो एक स्वादिष्ट फल है और लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं लेकिन यह एक स्वादिष्ट फल होने के साथ-साथ एक स्वास्थ्यवर्धक और लाभदायक फल भी है जो हमारे शरीर की कई रोगों से रक्षा करता है

तो आज हम इस जामुन से होने वाले तथा जामुन के पेड़ के अन्य भागों जैसे पत्ती, छाल इत्यादि से होने वाले फायदों के बारे में जानेंगे। वैसे तो सामान्यतः डायबिटीज के लिए जामुन का प्रयोग किया ही जाता है लेकिन इसके अतिरिक्त भी यह कई रोगों से रक्षा करता है।

मुंह के छालों के लिए

मुंह के छालों को दूर करने के लिए जामुन के पत्तों को फुटकर उबाले इस उबले हुए पानी से कुल्ला करने पर मुंह के छाले मिट जाते हैं। यह मुंह की दुर्गंध भी दूर करता है। जामुन की छाल को कूटकर पानी में उबालकर कुल्ला करते हैं। तो बैठा हुआ गला फिर ठीक हो जाता है।

घाव के लिए

जामुन के पत्तों का प्रयोग घाव को धोने के लिए कर सकते हैं इससे घाव भी शीघ्रता से भरता है।

डायबिटीज़ के लिए

जामुन का सिरका निकालकर उसका प्रतिदिन सेवन करने से डायबिटीज ठीक हो जाती है।

पाचन में

जामुन के सेवन से पाचन शक्ति में वृद्धि होती है खासकर इसके दल में पाचन शक्ति बढ़ाने की क्षमता होती है। इसे खाने से भूख भी अच्छी लगती है और अपच की समस्या दूर होती है।

मधुमेह में रामबाण

जामुन की गुठली, कुटकी, सूखा करेला और मेथी दाना को कूटकर पाउडर बना लें। इस पाउडर को प्रतिदिन लेने से मधुमेह में राहत मिलती है।

दाँत के रोगों में

दंत रोगों में जामुन का प्रयोग बहुत लाभकारी है। जामुन की छाल को सेंधा नमक के साथ मिलाकर पाउडर बना ले और प्रतिदिन उस पाउडर से दातुन करें जिससे मसूड़ों में होने वाली समस्या में राहत मिलती है। साधारणत भी जामुन खाने से दांत और मसूड़े मजबूत होते हैं।

नेत्र रोगों में

नेत्र रोग में भी जामुन काफी लाभदायक है। नेत्र रोग जैसे आंखों का लालपन, आंखों में संक्रमण इत्यादि को दूर करने के लिए जामुन के कोमल पत्तों को कूटकर कपड़े में बांधकर आंखों पर रखने से यह समस्याएं दूर होती है। जामुन और साथ ही आंवले के सेवन मोतियाबिंद नहीं होता। और मसूड़े भी मजबूत होते हैं।

बवासीर में

जामुन की पत्तियों का काढ़ा बनाकर पीने से बवासीर में शीघ्र ही राहत मिलती हैं।

अतिसार में

जामुन के कोमल पत्तों और छाल को साथ में कूटकर काढ़ा बना ले लेवे। इस काढ़े के प्रयोग से अतिसार की समस्या दूर होती है।

 हिमोग्लोबिन बढ़ाने में

जामुन का रंग उसमें उपस्थित आयरन वर्णक के कारण होता है और यही आयरन वर्णक आपको हिमोग्लोबिन बढ़ाने में सहायता प्रदान करता है।

त्वचा रोगों में

जामुन का कसैला स्वाद उसमें उपस्थित astringent property के कारण होता है। और यही astringent property मुंह पर फोड़े फुंसी नही होने देती। इसलिए जब भी जामुन का मौसम हो तो जामुन अवश्य खाएं।

हृदय रोग में

जामुन एक पोटेशियम रिच फल है और पोटेशियम हृदय के लिए आवश्यक और स्वास्थ्यवर्धक तत्व इसलिए जामुन का प्रयोग करने से हृदय संबंधी और रक्तचाप संबंधी समस्या दूर होती है।

एन्टिबैक्टिरियल गुण

जामुन के अंदर एंटी बैक्टीरियल एंटी इंफेक्शन और एंटीमलेरियल प्रॉपर्टीज पाई जाती है। जो आपको मलेरिया के संक्रमण के साथ-साथ अन्य संक्रमण रोगों से भी रक्षा करता है। जामुन मलेरिया के प्रोटो जोअन की वृद्धि को अवरोध करता है।

पथरी के लिए

जामुन की गुठली का पाउडर बनाकर उसे दही में मिलाकर लेने से किडनी और लीवर की पथरी समाप्त हो जाती है।

बच्चों के लिए

कुछ बच्चे बिस्तर में पेशाब करते है और इससे उन्हें बाद में फंगल इंफेक्शन हो जाता है  इससे बचने के लिए बच्चो को जामुन की गुठली का पाउडर खिलाए जिससे ये समस्या दूर होगी और उसे प्यास भी अच्छी लगेगी।

वजन घटाने में

जामुन आपके शरीर में जमा एक्स्ट्रा कोलेस्ट्रॉल को समाप्त करता है, और आपके वजन को शीघ्रता से कम करता है। तो यदि आप अपने वजन को शीघ्रता से काम करना चाहते हैं यह तो जामुन का सेवन अवश्य करें।

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