Charminar Hyderabad in hindi

Charminar Hyderabad | Charminar

Introduction-Charminar Hyderabad

भारत के सबसे पुराने शहर हैदराबाद के हृदय में स्थित, चारमीनार अर्थात चार टाॅवर,भारत के सबसे अधिक मान्यता प्राप्त प्राचीन स्मारकों में से एक है। यह एक  आर्किटेक्चरल आइकन है।

चारमिनार हैदराबाद के लिए, आगरा के ताजमहल और पेरिस के एफिल टॉवर की लोकप्रियता के बराबर है। यह गूगल पर सबसे अधिक सर्च किया जाने वाला ऐतिहासिक स्थल है। इसे बनाने में ग्रेनाइट,चूना पत्थर तथा संगमरमर पत्थरों का उपयोग किया गया हैं।

चारमीनार इमारत को इस्लामिक वास्तुकला के अनुसार बनाया गया हैं, जिसके लिए बाहर से आर्किटेक्चर बुलाए गये थे।

चार मीनार का इतिहास

चारमीनार का निर्माण 1591 में कुतुबशाही वंश के शासन के दौर में हुआ था, जिसके पांचवे शासक सुल्तान मुहम्मद कुतुब शाह थें। चारमीनार एवं इसके निर्माण के कारणों के बारे में काफी सारे सिद्धांत सामने रखे गए हैं। इसकी मुख्य धारा और सबसे प्रचलन में एक यह है कि एक समय एक प्लेग महामारी ने हैदराबाद शहर को मारा था,

और उस दौर में शासक सुल्तान मुहम्मद कुली कुतुब ने प्लेग को खत्म करने के लिए एक विशेष स्थान पर प्रेयर की थी। और जब यह प्लेग खत्म हुआ, उस स्थान पर जहां उन्होंने प्लेग से रक्षा की अपनी प्रार्थना की, वहां भव्य चारमीनार का निर्माण किया।

इस चारमीनार को बिल्कुल उसी जगह पर बनाया गया था जहाँ कुली कुतुब शाह ने पहली बार अपनी रानी भागमती को देखा। चारमीनार के बारे में एक और बात है,जिसमें गोलकुंडा किले से जुड़ी भूमि के अंदर एक सुरंग है। हालांकि, सबूतों की कमी के कारण, चारमीनार के इतिहास के बारे में कई कहानियों को पुराने इतिहासकारों ने एक जैसे खारिज कर दिया है।

चारमीनार की संरचना

चार मीनार में प्रत्येक दिशा में एक दरवाजा है, जो चारों और अलग अलग बाजारों में खुलता है। इसके प्रत्येक कोने में 56 मीटर ऊंची मीनारें है, जिसमें दो बालकनी हैं। हर मीनार के ऊपरी भाग में, नुकीले पत्तों की तरह,एक बल्बनुमा गोल गुंबद की डिजाईन है जिससे ऐसा लगता है मानो कि किसी ने चारमीनार को ताज पहना दिया है।

ताजमहल की हीं तरह चारमीनार में ये सब मीनारें इसकी मुख्य संरचना है। यहाँ सबसे उपर जाने के लिए 149 गोल घुमावदार सीढियां है। चारमीनार को गोलकोंडा किले से जोड़ने के लिए उसके भीतर बहुत सारी भूमिगत सुरंग का निर्माण कराया गया था।

ऐसा माना भी जाता हैं कि इसका निर्माण इसलिए हुआ, ताकि कभी किले में दुश्मनों के द्वारा घेर लिए जाने पर क़ुतुब शाही शासक वहां से छिप कर निकल सकें। इन सुरंगों के स्थान आज भी पता नहीं है। चार मीनार में मध्य में पानी का छोटा सा तालाब जैसा है,जिस पर फव्वारा लगा है, जहां मस्जिद में प्रार्थना करने से पहले लोग पानी से यहाँ हाथ पैर धोते थे।

चारमीनार कैसे पहुंचे

अगर आप चारमीनार घूमने आए हें तो आपको यह हैदराबाद रेलवे स्टेशन से करीब 7 किमी की दूरी पर स्थित है, बस द्वारा आएंगे तौ बस स्टेशन से इसकी दूरी करीब 5 कि.मी. है। अगर जो भी दर्शक  हवाई यात्रा से पहुंचते हैं तो इस भव्य मीनार को देखने के लिए उन्हें एयरपोर्ट से करीब 15 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है।

चार मीनार बाजार

चार मीनार के आसपास का क्षेत्र भी चार मीनार कहलाता है, लेकिन इसके आसपास अलग अलग बाजार भी है। चारमिनार के नजदीक स्थित लाद बाजार अपने गहनों के बाजार और अति सुंदर चूड़ियों के लिए जाना जाता है, जबकि पथर गट्टी बाजार मोतियों के लिए प्रसिद्ध है।

चार मीनार के चारों ओर के क्षेत्र में लगभग चौदह-पंद्रह हजार दुकानें होंगी। क़ुतुब शाही से लेकर तो  निजाम शासन तक और ब्रिटिश शासन से अभी तक चारमीनार के पास हल चल गतिविधियाँ होती है। इतिहास के अनुसार ये पूरे भारतवर्ष में एक अकेला ऐसा शाही इलाका था,जहाँ पर‌ इतनी अधिक आम आदमियों की हलचल होती थी।

चारमीनार की आयु

इस मीनार की ऐतिहासिक आयु 450 वर्ष से ज्यादा है, जो चारमीनार को भारत के  पुराने स्मारकों में से अलग बनाती है। आज भी ये स्मारक अपनी पूरी गौरव गाथा के साथ हैदराबाद शहर की रौनक में चार चांद लगा रहा है। इसके अलावा बढ़ते प्रदूषण के चलते तेलंगाना सरकार भी इस स्मारक के बचाव के चलते इसके आसपास 200 मीटर के दायरे को नो वेहिकल जोन घोषित करने की कोशिश कर रही है। प्रदूषण की वजह से इमारत की बाहरी चमक और सौंदर्यता उड़ने लगी है।

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