Earthquake in hindi

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Earthquake in hindi

Earthquake in hindi | Earthquake

आखिर क्यों भूकंप से धरती काँप जाती है ?

भूकंप के कारण

पृथ्वी पर उपस्थित सभी महाद्वीप और महासागर कुछ प्लेटो से मिलकर बने है जो की ठोस अवस्था में है तथा पृथ्वी की भूप्रपटी का निर्माण करती हैं,ये प्लेट्स एक मेंटल स्तर पर तैर रही जो की द्रवित अवस्था मैं है, इसी कारण ये प्लेटे आपस में टकराती हैं और इन्हीं के फलस्वरूप भू गर्भिक घटनाओं का जन्म होता हैं। जैसे भूकंप , ज्वालामुखी, पर्वत निर्माण इत्यादि!

भूकंप की उत्पत्ति के मानवीय कारण

चुकी भूकंप एक प्राकृतिक घटना है, परंतु इसके कुछ मानवीय कारण भी उपज आए हैं। जैसे ज़मीन में गहरी सुरंगों का निर्माण ,नदियों पर बड़े बड़े बांध बनाना, अनुसंधान व परमाणु परीक्षण इत्यादि,जो की मानव के लिए आवश्यक है किंतु वर्तमान मैं अति की ओर जा रहें हैं।

भूकंप का विश्व और भारत में वितरण

भूकंप अधिकांशत उन्ही स्थानो पर ज्यादा आता है ,जहां दो प्लेट आपस में टकराती है,जैसे प्रशांत महासागर में इसी के कारण एक भूकंपीय और ज्वालामुखीय क्षेत्र का निर्माण हुआ हुआ है , जिसे *ring of fire* कहा जाता है। यहां विश्व के सबसे ज्यादा भूकंप आते है इस क्षेत्र में जापान , इंडोनेशिया इत्यादि देश आते हैं।

एक दूसरा बड़ा भूकंपीय क्षेत्र मध्य अटलांटिक महासागर है जो समुद्र में स्तिथ होने के कारण कम विनाशकारी है। भारत में भूकंप के चार क्षेत्र है,इनमें सर्वाधिक संवेदनशील पूर्वोत्तर भारत का क्षेत्र हैं जहां के राज्य कभी बाढ़ की मार झेलते है, तो कभी भूकंप की फिर भी वे पर्यावरण रक्षण में सबसे आगे हैं।

भूकंप एक अभिशाप

चाहे भूकंप एक प्राकृतिक घटना है परंतु है बहुत विनाशकारी हैं। ये आपदा राष्ट्र के जन ,धन की हानि करती हैं और एक प्राकृतिक घटना होते हुए भी लोगो के लिए अभिशाप बन जाती हैं। यह न जाने कितने लोगो को काल का ग्रास बना देती हैं यह लोगो को हमेशा भय की बेड़ियों में जकेड़ कर रखती है।

खास कर पूर्वोत्तर के राज्यों में अधिकतम तीव्रता वाले भूकंप आते हैं,जो उन्हें बेसहाय और बेघर कर देता हैं। ये भूकंप केवल उन्हें शारीरिक ही नही बल्कि मानसिक रूप से भी विकृत करता हैं।

24 दिसंबर वर्ष 2004 में आये इंडोनेशिया भूकंप के कारण सुनामी भी उत्पन्न हो गई थी और उस हादसे 3 लाख लोगो की जाने गई थी और फिलहाल मैं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी 6.4 तीव्रता वाले भूकंप को झेला गया जो प्राकृतिक और मानवीय दोनो कारण से प्रबल बना। हालांकि इस भूकंप से अधिक क्षति नहीं हुई परन्तु ये सतर्क होने का संकेत भी हैं।

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उपाय एवं सावधानियां

भूकंप एक पर्यावरणीय घटना है तो इसका पूर्ण निदान तो संभव नही हैं पर इसके दुष्परिणामों को कम किया जा सकता हैं। इसके लिए कुछ व्यक्तिगत प्रयास किए जाने चाहिए तथा कुछ शासकीय। व्यक्तिगत प्रयास के अंतर्गत हम स्वयं जागरूक होकर सबको जागरूक करने का प्रयास सकते हैं कुछ ऐसे उपाय है,जो भूकंप आने के पहले किए जाने चाहिए ताकि क्षति कम से कम हो तथा कुछ उसके रहते भी।

भूकंप पूर्व सावधानियां

यह शासन का कर्तव्य है कि वह ऐसे क्षेत्रो की मैपिंग करे जो भूकंप के लिए संवेदनशील है तथा वहां की जनता को विभिन्न माध्यम से इससे निपटने के उपाय बताए । भूकंप से ग्रसित क्षेत्र मैं लोगो को सुरक्षित स्थान पर निवास करने को प्रेरित करें व स्थान खोजने में सहायता करें। भूकंप से यदि हानि होती है,तो ग्रसित व्यक्तियों की हर प्रकार की सहायता की जाए

जिससे उनका मनोबल न टूटे।

अब तक किए गए प्रयास

भारत सरकार की एक संस्था ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड ऐसे क्षेत्रों और इमारतों के लिए कोड अंकित करती हैं ताकि वहां सहायता पहले पहुचाई जा सकें। सरकार द्वारा ऐसे क्षेत्रो में लोगो को जागरूक कर उन्हे भूकंप रोधी आवास बनाने को प्रेरित कर रही हैं और संभव सहायता भी कर रही है! राष्ट्रीय स्तर पर Earthquake Engineering Research Centre (EERC) जैसे केंद्र की स्थापना और अभी वर्तमान में राज्य और जिला स्तर पर सहायता और सतर्कता केंद्र बनाने का कार्य किया जा रहा है। साथ हीं जनजागरुकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

जापान जैसे देश जो ऐसी आपदाओं का प्रतिदिन सामना करते है फिर भी विकसित है ऐसे में उन देशों से सीखने का भाव भी होना चाहिए‌।

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