Aurangzeb biography in hindi

Aurangzeb biography in hindi | Aurangzeb

Introduction

समूचे भारत पर राज करने वाले मुगल साम्राज्य का हर पहलू मजबूत था। लेकिन उस साम्राज्य में हमेशा उत्तराधिकार के लिए युद्ध होते थे। अकबर के समय हुए, फिर जहांगीर के समय हुए और शाहजहां के समय भी हुए। शाहजहां जिसने 1627 से 1658  तक शासन किया। उसके बाद शासन करने की स्थिति में नहीं रहा तो उसके पुत्रो में शासक बनने की होड़ मच गई।

उसके चारो पुत्र दाराशिकोह , शाहसूजा, ओरंगगजेब,मुराद बख्श में युद्ध शुरू हो गए।

इनमे से अंतिम में केवल दो पुत्र बचे ओरंगजेब और दाराशिकोह। ओरंगजेब ने दारा के देवराई के युद्ध में पराजित कर दिया और स्वयं शासक बन बैठा। उसने अपने पिता को भी ताजमहल में कैद कर दिया था जहा पर ही शाहजहां की मृत्यु हो गई थी।

औरंगजेब-Aurangzeb biography in hindi

औरंगजेब का जन्म 1618 में हुआ। शाहजहां जिस समय दिल्ली का शासक था तब उसने औरंगजेब को दक्षिण का सूबेदार बनाया था। इसी कारण ओरंगजेब को दक्षिणी क्षेत्रों का अच्छा अनुभव था। राज्य मिलते ही उसने साम्राज्य विस्तार की नीति अपनाने का सोचा और साम्राज्य विस्तार का कार्य आरंभ किया।

साम्राज्य विस्तार

शासक बनते ही औरंगजेब ने सबसे पहले बंगाल पर आक्रमण किया और असम के अहोमो को भी हराया और पूर्व में अपने  साम्राज्य का विस्तार वहां तक किया। यह कार्य उसके सूबेदार मीर जुमला ने किया था।

बंगाल विजय के पश्चात उसने दक्कन की ओर अभियान भेजा। लेकिन दक्कन ओरंगजेब के लिए गले की हड्डी सिद्ध हुआ। क्युकी वह कभी स्वयं को दक्कन से बाहर नहीं निकाल पाया।

वहां उसका सामना मराठों से हुआ था इस कारण से। जब ओरंगजेब मुगलों का शासक था उसी समय मराठों के शासक शिवाजी थे।

मराठे उनकी युद्धनीति के कारण मुगलों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया था। शिवाजी की शक्तियों को कुचलने के लिए ओरंगजेब ने राजा जय सिंह को भेजा था । राजा जय सिंह और शिवाजी के मध्य पुरंदर की संधि की हुए थी। हालांकि ओरंगजेब की मृत्यु के बाद भी मराठा और मुगलों में संघर्ष चलता रहा था।

कला साहित्य और धार्मिक नीति

औरंगजेब को अपने पूर्वजों की भाती कला और साहित्य में कोई रुचि नही थी। वह केवल साम्राज्य विस्तार पर जोर देता था। इसी कारण उसके समय के बहुत कम स्मारक मिलते है तथा वह धार्मिक रूप से भी काफी कट्टर था। इसलिए उसने हिंदूओं पर लगने वाले धार्मिक कर जजिया को पुन: हिंदू जनता पर लगा दिया था।  यह कर अकबर ने बंद कर दिया था। यह कर इस्लाम अतिरिक्त अन्य धर्म के लोगो से वसूला जाता था।

हालांकि यह योग्यता से समझोता नही करता था। इसलिए यह सेना के दरबार में हर धर्म के व्यक्ति को उनकी योग्यता के कारण स्थान देता था।

औरंगजेब को इतिहासकार जिंदा पीर कहते हैं।

औरंगजेब के जीवन के सकारात्मक और नकारात्मक पहलू

औरंगजेब धार्मिक रूप से कट्टर मुसलमान था इसलिए उसने अकबर द्वारा हटाए गए सजाकर को वापिस हिंदू जनता को पर लगाया उसने कुछ हिंदू मंदिरों को भी तुड़वा दिया था। उसके मस्तिष्क में इस्लाम का प्रसार की मानसिकता थी लेकिन वहीं दूसरी तरफ वह क्षमता और कौशल से समझौता नहीं करता था और यही कारण है कि उसकी सेना के अंदर बहुत से सैनिक और योद्धा इस्लाम धर्म के अलावा भी अनेक धर्मों से थे। एक पक्ष एक पक्ष यह देखने को मिलता है कि मुगल काल में उत्तराधिकार से संबंधित कोई बेहतर नियम नहीं था इसलिए राज्य को लेकर हमेशा लड़ाई होती थी जैसा कि जहांगीर के मरने के बाद में शाहजहां और उसके भाई आपस में समृद्धि के लिए लड़ते थे।

जब यही शाहजहां सम्राट बन गया और जब इसके राज्य काल के दौरान उत्तराधिकार की बात हुई तो फिर उसके पुत्रों में उत्तराधिकार का युद्ध प्रारंभ हो गया जिसमें औरंगजेब ने अपने तीनों भाइयों की हत्या कर रांची को हत्या लिया और अंत में अपने पिता की निर्मम हत्या कर दी यह सोच कर कि मेरे पिता ने भी अपने भाइयों और पिता की हत्या की थी तो यह देखा जा सकता है कि मुगल हाथों में जहां धर्म कौशल संपदा सब कुछ था लेकिन वह भी कुछ आधारभूत नीति के गुण नहीं थे।

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