Introduction of alauddin khilji in hindi

Introduction of alauddin khilji | alauddin khilji

Introduction of alauddin khilji

मोहमद गौरी अपने साम्राज्य विस्तार के मकसद और इस्लाम प्रसार के मकसद से भारत आया था। वह यहां से विजित धन को अपने साथ ले गया और यहां के जीते राज्य को अपने गुलामों के हवाले कर गया।  जिन्होंने यहां गुलाम वंश की स्थापना की ओर दिल्ली सल्तनत का काल आरंभ हुआ।

जिसमे पांच प्रमुख वंश क्रमश: आए।

1गुलाम वंश, 2 खिलजी वंश, 3 तुगलक वंश, 4 सय्यद वंश, 5 लोदी वंश। गुलाम वंश ने 1206 से 1290 तक दिल्ली सल्तनत पर राज किया और फिर आया इस दिल्ली सल्तनत का सबसे प्रभावशाली वंश खिलजी वंश। जिसका एक शासक अलाउद्दीन खिलजी था। जो क्रूरता और राजनीति दोनो के लिए विश्व प्रसिद्ध था।

खिलजी वंश की स्थापना

खिलजी वंश की नीव जलाउद्दीन खिलजी ने 1290 में  रखी थी। इसने छह वर्षो तक शासन किया फिर इसके भतीजे अलाउद्दीन खिलजी ने इसकी हत्या कर इससे राज्य हड़प लिया।

अलाउद्दीन खिलजी का शासन

अलाउद्दीन खिलजी का शासन काल 1296 से 1316 तक रहा। इसके सत्ता में आते ही उसने कही  परिवर्तन किए। इसने आमजनता के सहानुभूति बरतने के स्थान पर कठोरता अपनाई।

अलाउद्दीन खिलजी ने साम्राज्य विस्तार की नीति अपनाते हुए। उत्तर और दक्षिण में कहीं युद्ध अभियान भेजे जिससे इसके साम्राज्य का विस्तार हुआ। दक्षिण में इसके साम्राज्य का प्रमुख था मालिक कफूर। इसी मालिक काफुर ने दक्षिणी राज्य वारंगल के शासक प्रताप रुद्र देव परास्त कर उससे कोहिनूर हीरा छीन लिया।

उत्तर में इसने उलुग खां, नुसरत खां, आइनमुल्क मुल्तानी को भेजा था जिन्होंने गुजरात, चितौड़, मालवा जालौर पर विजय प्राप्त की। अलाउद्दीन खिलजी सिकंदर की तरह विश्व विजय करना चाहता था इसलिए उसने यह विभिन्न चलाए थे और स्वयं को एक उपाधि दी थी।

सिकंदर सानी

साम्राज्य विस्तार के साथ अलाउद्दीन खिलजी कई नीतियां लागू की ओर कही कार्य किए।सैन्य व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण। अलाउद्दीन खिलजी स्थाई सेना रखने वाला पहला शासक था। और इसी के शासन काल में सिपाहियो को नगद वेतन देना प्रारंभ किया गया इसके पहले उन्हें जागीर दी जाती थी तथा सेना को हुलिया (प्रतीक) देने वाला यह पहला शासक था। इसने घोड़ों को भी दागने की प्रथा शुरू की थी।

कला साहित्य में योगदान

अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी राजधानी दिल्ली में एक हौज ए खास व हजार सितून ( हजार स्तंभ वाला महल) का निर्माण करवाया। इसके अतिरिक्त उसने अलाई दरवाजा का निर्माण करवाया था। अलाउद्दीन ख़िलजी को संगीत व साहित्य में बड़ी रुचि थी। उसके दरबार में अमीर खुसरो जैसे कवि थे। जिन्होंने तबले का अविष्कार किया था।

बाजार नीति

अलाउद्दीन ख़िलजी ने कहीं बाजार और व्यापार सुधार किए जो कहीं वर्षो तक चलते रहें। उनकी सटीकता के कारण। ये पक्ष उसकी दूरदर्शिता को दर्शाता हैं। उसकी बाजार नीति में प्रमुख पहलू थे।

बाजार सुधारो के तहत अलाउद्दीन ख़िलजी ने तीन प्रमुख बाजार स्थापित किए – प्रथम खाद्यान नीति , द्वितीय वस्त्र नीति, तथा कीमती वस्तुओ का बाजार । बाजार के लिए एक प्रमुख अधिकारी नियुक्त किया जो शहना ए मंडी था। प्रत्येक व्यापारी को स्वयं को इसके पास पंजीकृत करवाना आवश्यक था। तभी वह व्यापार का कर सकता था।

खिलजी वंश का अंत

अलाउद्दीन खिलजी की मृत्यु के पश्चात उसका मंत्री मालिक काफूर स्वयं को शासक बनाना चाह रहा था लेकिन उसका पुत्र मुबारक शाह  उसको हटाकर शासक बन गया। लेकिन जल्द ही उसकी अक्षमता के कारण वह हटा दिया और उसे हराकर गयासुद्दीन तुगलक दिल्ली सल्तनत का शासक बन गया और एक नए वंश की स्थापना की।

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